यह शैक्षणिक भ्रमण रिपोर्ट नेतरहाट (लातेहार, झारखंड) के तीन दिवसीय भ्रमण पर आधारित है, जिसमें भूगोल विभाग के 27 विद्यार्थियों, 3 शिक्षक और 1 शिक्षाकर्मी ने भाग लिया। भ्रमण का उद्देश्य क्षेत्रीय पर्यटन विकास, उसकी संभावनाओं, चुनौतियों तथा आदिम जनजातियों की संस्कृति और जीवनशैली का अध्ययन करना था। नेतरहाट को "छोटानागपुर की रानी" और "झारखंड का शिमला" कहा जाता है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण, जलप्रपातों और वन्य वैभव के लिए प्रसिद्ध है। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सूर्योदय बिंदु, अपर घाघरी जलप्रपात, नाशपाती बगान, नेतरहाट झील, शैले हाउस, नेतरहाट आवासीय विद्यालय, लोध जलप्रपात और सूर्यास्त स्थल जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने चीड़ वृक्षों, जलप्रपातों की बनावट, जनजातीय उपकरणों, ग्रामीण आवासों और पर्यावरणीय विशेषताओं को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा। भ्रमण ने विद्यार्थियों को क्षेत्रीय भूगोल, पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक विविधता का गहन ज्ञान प्रदान किया। साथ ही उन्होंने जनजातीय समुदायों के रहन-सहन और भाषा को भी करीब से समझा। यद्यपि भ्रमण सुखद और ज्ञानवर्धक रहा, लेकिन कुछ प्रमुख समस्याएँ जैसे कि खराब सड़कें, सीमित पर्यटक सुविधाएँ और जनजातीय संस्कृति पर बाहरी प्रभाव भी सामने आए। सुझाव स्वरूप पर्यटन अवसंरचना में सुधार, स्थानीय रोजगार सृजन और सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता बताई गई। कुल मिलाकर यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद अनुभव साबित हुआ।अंत में, सभी विद्यार्थी और शिक्षक सकुशल अपने-अपने घर सुरक्षित रूप से पहुँच गए।